राजधानी के बाहरी इलाकों में शहरी विकास पर फोकस

राजधानी के बाहरी इलाकों में शहरी विकास पर फोकस
भोपाल / शहर के नए मास्टर प्लान का खाका तैयार कर लिया गया है। जिसके तहत राजधानी का वर्टिकल डेवलपमेंट किया जाएगा। शहर में लगातार बढ़ रहे आबादी के दबाव को कम करने के लिए प्लानिंग एरिया में 77 गांवों को शामिल किया गया है। इनमें नई टाउनशिप विकसित करने की योजना है। यही नहीं इन गांवों में 51 भोपाल के और 26 सीहोर जिले के गांवो को शामिल किया गया है। इसके अलावा 60 मीटर या उससे चौड़ी सड़कों के दोनों ओर बहुमंजिला इमारतें बनाई जाएंगी। प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री कमल नाथ ने छिंदवाड़ा मॉडल पर शहरों के आसपास के नगरों, कस्बों को विकसित करने के लिए कहा था। बुनियादी इंफ्रास्ट्रचर के साथ ही रोजगार व उद्योग के अवसर मुहैया कराने के लिए कहा था। मास्टर प्लान का प्रेजेंटेशन देखने के दौरान भी सीएम ने शहरों में आबादी व ट्रेफिक का दबाव कम करने के लिए आउटर एरिया में भी अर्बन प्लानिंग करने के लिए कहा था। इस पर अधिकारियों ने बताया था कि नए प्लानिंग एरिया में शामिल गांवों के विकास के लिए स्कीम तैयार की गई है। 
टीओडी को भी किया शामिल  
राज्य सरकार ने ट्रांजिट ओरियंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) पॉलिसी बनाई है। मकसद यह कि मेट्रो रूट व अन्य प्रमुख मार्गों के आसपास के क्षेत्रों को विकसित किया जाए। घर, ऑफिस, शॉपिंग कॉम्पलेक्स पास ही हों। इसके लिए ज्यादा निर्माण की अनुमति (एफएआर) दी जाएगी। टीओडी को मास्टर प्लान के मसौदे में शामिल किया गया है। इसमें 60 मीटर या इससे ज्यादा चौड़ी सड़कों के दोनों ओर 300 से 500 मीटर की दूरी में हाइराइज इमारतें बनाने की परमिशन दी जाएगी। मिस लैंड यूज के लिए कमर्शियल, रेसीडेंशियल, मॉल, पार्किंग, पार्क, स्कूल- कॉलेज, स्मार्ट रोड और बस स्टैंड होते हैं। भोपाल में मेट्रो के एस से करोंद और डिपो चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक के दोनों ओर भी टीओडी से विकास किया जाएगा।